शुक्रवार, 13 अप्रैल 2018

"जीवन और संघर्ष"

संघर्षों से है यह जीवन,
       प्रतिपल यह संघर्ष है ।
दृढ़ ,निश्चय और धैर्य ,लगन से ,
       शीघ्र फलित उत्कर्ष है।

हर पल होता यहां परीक्षण,
        जीवन के उच्च विचारो से।
हटे नही जो , डटे रहे तुम,
        विजयी होगे मझधारो से ।

 दर्पित अरि जब रणभूमि में,
             गर तुमसे टकराएंगे ।
सलिल,अनीक,कृशानि,केशरी,
             नतमस्तक हो जाएंगे।

 गर भय हो जाए तम दर्पण से,
          लड़कर उसे मिटाओ तुम।
कर्म-शक्ति और विजय घोष कर ,
           सिंधु पार कर जाओ तुम।

 तरणि समान वेग सी शोभित,
           ज्ञान-ध्वजा लहरा देना।
जड़,अनुचर,और आत्मप्रवंचित
        को सम-जाह दिला देना ।

मातृभूमि औऱ माँ चरणों का ,
       कर्ज अदा जो कर पाए।
संघर्षित, अनवरित जीवन का,
     फल-उत्कर्ष ये मिल जाए।
                         
  "प्रतीक तिवारी"

8 टिप्‍पणियां:

  1. Jabardast Mr. Tiwari., Very heart touching poem written by you. Good, god may bless u.

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  2. आपकी इस लेखनी को देखकर,पढ़कर, और महसूस करके मेरा मन काफी खुश हुआ और उल्लास और उमंग से भर उठा।मैं ईश्वर से कामना करता हूँ कि आप हमेशा इशी प्रकार अपने हिंदी शब्दकोश को अपनी मेहनत और लगन से सिंचित करते रहिए ताकि वो आपके भविष्य के लिए एक मीठे फल के स्वरूप में प्राप्त करे।।बहुत खूब

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  3. आपकी इस लेखनी को देखकर,पढ़कर, और महसूस करके मेरा मन काफी खुश हुआ और उल्लास और उमंग से भर उठा।मैं ईश्वर से कामना करता हूँ कि आप हमेशा इशी प्रकार अपने हिंदी शब्दकोश को अपनी मेहनत और लगन से सिंचित करते रहिए ताकि वो आपके भविष्य के लिए एक मीठे फल के स्वरूप में प्राप्त करे।।बहुत खूब

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  4. आपकी इस लेखनी को देखकर,पढ़कर, और महसूस करके मेरा मन काफी खुश हुआ और उल्लास और उमंग से भर उठा।मैं ईश्वर से कामना करता हूँ कि आप हमेशा इशी प्रकार अपने हिंदी शब्दकोश को अपनी मेहनत और लगन से सिंचित करते रहिए ताकि वो आपके भविष्य के लिए एक मीठे फल के स्वरूप में प्राप्त करे।।बहुत खूब

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  5. आपके इस ताबड़तोड़ उत्साहवर्धन को मेरा आभार रूपी नमन 🙏...

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