संघर्षों से है यह जीवन,
प्रतिपल यह संघर्ष है ।
दृढ़ ,निश्चय और धैर्य ,लगन से ,
शीघ्र फलित उत्कर्ष है।
हर पल होता यहां परीक्षण,
जीवन के उच्च विचारो से।
हटे नही जो , डटे रहे तुम,
विजयी होगे मझधारो से ।
दर्पित अरि जब रणभूमि में,
गर तुमसे टकराएंगे ।
सलिल,अनीक,कृशानि,केशरी,
नतमस्तक हो जाएंगे।
गर भय हो जाए तम दर्पण से,
लड़कर उसे मिटाओ तुम।
कर्म-शक्ति और विजय घोष कर ,
सिंधु पार कर जाओ तुम।
तरणि समान वेग सी शोभित,
ज्ञान-ध्वजा लहरा देना।
जड़,अनुचर,और आत्मप्रवंचित
को सम-जाह दिला देना ।
मातृभूमि औऱ माँ चरणों का ,
कर्ज अदा जो कर पाए।
संघर्षित, अनवरित जीवन का,
फल-उत्कर्ष ये मिल जाए।
"प्रतीक तिवारी"
प्रतिपल यह संघर्ष है ।
दृढ़ ,निश्चय और धैर्य ,लगन से ,
शीघ्र फलित उत्कर्ष है।
हर पल होता यहां परीक्षण,
जीवन के उच्च विचारो से।
हटे नही जो , डटे रहे तुम,
विजयी होगे मझधारो से ।
दर्पित अरि जब रणभूमि में,
गर तुमसे टकराएंगे ।
सलिल,अनीक,कृशानि,केशरी,
नतमस्तक हो जाएंगे।
गर भय हो जाए तम दर्पण से,
लड़कर उसे मिटाओ तुम।
कर्म-शक्ति और विजय घोष कर ,
सिंधु पार कर जाओ तुम।
तरणि समान वेग सी शोभित,
ज्ञान-ध्वजा लहरा देना।
जड़,अनुचर,और आत्मप्रवंचित
को सम-जाह दिला देना ।
मातृभूमि औऱ माँ चरणों का ,
कर्ज अदा जो कर पाए।
संघर्षित, अनवरित जीवन का,
फल-उत्कर्ष ये मिल जाए।
"प्रतीक तिवारी"