सुनो सभी ओ भारतवासी,
मिली आजादी अच्छी खासी ।
मिल-जुल कर फिर हाथ जुटे सब,
सुंदर स्वच्छ बने भारत तब ।।
साबरमती के संत ने ,
आज फिर किया आव्हान है ।
दीर्घ स्वप्नित लक्ष्य पर सबका यही अब गान है ।
"हौसलों से मुठ्ठियाँ भर ,
जन चेतना से भींचकर"
हम साथ सबको ले चलें..
"स्वच्छ भारत" गान गाते संग सब चलते चलें।
गांव , कस्बा , गली सारी
साफ रखना ध्येय हो ।
यह अगर हम ठान लें तो
फिर किसे संदेह हो।
जागरुकता मंत्र एक
आज लेकर हम चलें
"स्वच्छ भारत" गान गाते संग सब चलते चलें।
बच्चे ,बूढ़े और बहनें
सभी आए अब सभी
हाथ में यह कार्य लेकर
पूर्ण करलें व्रत अभी ।
पूर्वजों के दिए व्रत से
सब पुनः से सबक लें
"स्वच्छ भारत" गान गाते संग सब चलते चलें ।
कूड़ेदान और शौचालय की
कीमत सबको समझानी है।
जैव अपशिष्ट प्रबंधन कर
अब जैविक खाद बनानी है।
ई-कचरे और कारख़ाने की
बातें अभी अधूरी है।
पुनर्चलन, निदान यही दो बातें बड़ी जरूरी है ।
"हो प्रदूषण मुक्त भारत"
गीत गुनगुनाते चलें।
"स्वच्छ भारत" गान गाते संग सब चलते चलें ।
आओ सब मिल हाथ बढ़ाए
और स्वच्छता हम अपनाएं
चेतनता के दिए जलाकर
स्वप्न को अब साकार बनाएं।
जन-जन का हो अब यह नारा
स्वच्छ भारत बनें हमारा
फैले हरियाली चंहु ओर
तभी बढ़ेगा " एक कदम स्वच्छता की ओर "
स्वैच्छिक विचारों की श्रृंखला को
पूर्ण पोषित कर चलें
"स्वच्छ भारत" गान गाते संग सब चलतें चलें।
प्रतीक तिवारी