गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

"रंगों पर राजनीति"

उत्तरप्रदेश के बदायूं में जिस प्रकार बाबा साहेब की प्रतिमा पर भगवा रंग चढ़ाया गया ,इससे यह धीरे-धीरे स्पष्ट होता जा रहा कि यूपी में रंग की राजनीति सीएम हाउस के भगवामय होने से शुरू होकर प्रतिमाओ में आकर के उलझ गई है ।

         प्रशासन द्वारा प्रतिमा को ठीक कराने के उद्देश्य से प्रतिमा पर भगवा रंग की परत चढ़ा देने से यह स्पष्ट होता है कि सरकार या फिर कोई भी राजनीतिक दल जनता की सास्कृतिक भावनाओं को लक्ष्य बनाकर जनता  को इस ओर ध्यान आकर्षित करने की राजनीति कर रहे है ।
        कोई नीला,कोई भगवा,कोई लाल ,तरह -तरह के रंगों की राजनीति पर वोट बैंक का रंग चढ़ाने के लिए ये दल यह भूल जाते है कि हमने संविधान की शपथ लेकर समाज से इसी भेदभाव को मिटाने के लिए राजनीति में कदम रखा है । 
      सभी राजनीतिक दलों एवम पार्टियों को यह समझना होगा कि सांस्कृतिक भावनाओं से खिलवाड़ और  उनसे उनकी विरासत से छीनने का यह प्रयास धार्मिक उन्माद और साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देगा और लोंगों का लोकतंत्र में से भरोसा उठने में देर न लगेगी ।

"प्रतीक तिवारी"

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