जब पुष्प लगे तो मधु को रस..
करते सबको निःस्वार्थ प्रेम
फल लगते ही सबको देते ..
अधम भूख से शांति नेम।।
हर राहगीर का साथी बन..
देते है उसको शीतल छाँव
ह्रदयाशीष देकर इनको..
करते सबको निःस्वार्थ प्रेम
फल लगते ही सबको देते ..
अधम भूख से शांति नेम।।
हर राहगीर का साथी बन..
देते है उसको शीतल छाँव
ह्रदयाशीष देकर इनको..
राही रखता है थके पांव।।
हर जाने वाले राही ने ..
नव युग की आवाजाही ने
उस भृमतित भटके माही ने
हम सबकी लापरवाही ने।।
जो तोड़ा है बंधन हमसे
इस वर्तमान की खाई ने
नित नेम ही वृक्ष लगाकरके
नव पल्लव से शोभित करके
गुंजार इन्हें करना होगा
तव ही सब रोग रहित होकर
हर जाने वाले राही ने ..
नव युग की आवाजाही ने
उस भृमतित भटके माही ने
हम सबकी लापरवाही ने।।
जो तोड़ा है बंधन हमसे
इस वर्तमान की खाई ने
नित नेम ही वृक्ष लगाकरके
नव पल्लव से शोभित करके
गुंजार इन्हें करना होगा
तव ही सब रोग रहित होकर
सुंदर शोभित जीवन होगा ।।
"प्रतीक तिवारी "
"प्रतीक तिवारी "