बुधवार, 11 अप्रैल 2018

"हितैषी बनने की होड़"

" हितैषी बनने की होड़"

-"मैं हिन्दू हूं", "हम ईद नही मनाते", "मैं जनेऊधारी हिंदू हूं"।

तरह -तरह के विलाप करते हुए इन पंडितों और धर्मगुरुओं की हितैषी सभा ने शुभचिंतक दिखने की होड़ ने वर्तमान राजनीति की दिशा एवं दशा दोनों को धुंधले रास्ते मे लाकर रख दिया है ।

       इसी तर्ज में जारी है आजकल ज्यादा दलित हितैषी दिखने का क्रम। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनजाति/अनु.जनजाति एक्ट पर कुछ प्रावधान किये गये ,और जारी हुआ हितैषी और शुभचिंतक दिखने का सिलसिला।

दलित  संगठनों ने जैसे ही भारत बंद का एलान किया ,कुछ घंटों बाद राजनीति दलों और फर्जी राष्ट्रवादियों एवं कतिथ कम्युनिस्टों का दलितों के प्रति दर्द फूट पड़ा।

और ट्वीट-ट्वीट के खेल खेलकर अपनी- अपनी उपस्थित दर्ज करा दी ।

        प्रायः देखने को आता है कि किसी आंदोलन या प्रदर्शन में हर एक दल अपनी रोटियां इन आंदोलनो पर सेंकने की कोशिश करता है,और आंदोलन की मूलभूत आवाज इस राजनीति बयानबाजी और शोरगुल के बीच दब कर रह जाती है ।
 
"प्रतीक तिवारी"

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