चाय की आखिरी घूंट जैसी हो तुम जिसे न खत्म करना अच्छा लगता है ..न छोड़ना !!
यूं तो उस पेड़ को कटे जमाना हो गया मगर ढूंढने अपना ठीकाना वो परिंदा रोज आता है !!
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